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Ho Bhasha Sahitya Ki Vikas Yatra (हो भाषा-साहित्य की विकास यात्रा)

200

‘हो’ भाषा और साहित्य पर शोधात्मक पुस्तक

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Description

डॉ. इन्दिरा ने हो मातृभाषा और उसके लोक साहित्य के साथ-साथ शिष्ट साहित्य के विकास की यात्रा पर भी गंभीरता से प्रकाश डाला है। हो जनजाति के भाषिक एवं सांस्कृतिक पक्ष का भी विश्लेषण इसमें किया गया है। हो लोक साहित्य के समृद्ध पक्ष को भी इसमें उजागर किया गया है। वर्तमान में हो के शिष्ट साहित्य की विविध विधाओं काव्य, कहानी, उपन्यास, निबंध, आलोचना आदि पर भी इसमें प्रकाश डाला गया है। इस दृष्टि से यह पुस्तक हो लोगों के लिए ही नहीं अन्य हो प्रेमियों के लिए भी उपादेय है।

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