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Jangal Se Aage (जंगल से आगे )

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यह सीता रत्नमाला की अंग्रेजी में लिखी हुई भारत की पहली आदिवासी आत्मकथा ‘बियोंड द जंगल’ की हिंदी प्रस्तुति है। इसका मूल अंग्रेजी संस्करण भारत में प्राप्य नहीं है और अब यह दुर्लभ है। नीलगिरि के पहाड़ों पर रहने वाली सीता रत्नमाला नीलगिरि इरुला आदिवासी समुदाय की है। आलोचकों के अनुसार यह एक अनूठी आत्मकथा है जो आत्मकथा के प्रचलित चौखटे में फिट नहीं होती है। वजह है इसकी विशिष्ट आदिवासी कहन शैली। आदिवासी दृष्टि और अनुभवों से लिखी गई यह आत्मसंस्मरण कई मायने में पाठकों का ध्यान खींचती है। जैसे, इसकी अद्भुत कथा, मार्मिक और दिल को छू लेने वाली घटनाएं, कहने की बहुत ही सरल लेकिन जानदार शैली। इसका अनुवाद हिंदी कथा के सुपरिचित अश्विनी कुमार पंकज ने किया है, जो आदिवासी अध्ययन के लिए जाने जाते हैं।

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