Jharkhand Ka Itihas (झारखंड का इतिहास)

150

आदिवासी इतिहास और समाज में रुचि रखने वालों के लिए एक बेहद जरूरी किताब

Compare

Description

झारखंड का इतिहास अब तक गैर-आदिवासी विद्वानों ने ही लिखा है. लेकिन संभवतः यह पहली किताब है जिसे एक आदिवासी ने लिखा है. इतिहास पर मुंडारी पुरखा (लोक) साहित्य को आधार बना कर ‘मुंडारी लोक साहित्य में इतिहास’ पुस्तक की रचना कर चुके डा. सिकरा दास की यह दूसरी किताब है. अपनी इस नई इतिहास पुस्तक में डा. तिर्की ने झारखंड पर अब तक लिखे गए इतिहास लेखन पर आदिवासी दृष्टि से गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने न सिर्फ गैर-आदिवासियों के इतिहास लेखन के एप्रोच को चुनौती दी है बल्कि यह भी बताया है कि झारखंड का इतिहास नागवंशियों (गैर-आदिवासी मूल निवासियों) के शासन से शुरू नहीं होता है. आदिवासी इतिहास और समाज में रुचि रखने वालों के लिए एक बेहद जरूरी किताब.

Reviews

There are no reviews yet.

Only logged in customers who have purchased this product may leave a review.