By toakhra

निश्छल प्रेम से जुड़े रहने की गाथा है ‘जंगल के आगे’

– अरविंद अविनाश  | 1968 में ब्लैकवूड द्वारा प्रकाशित सीता रत्नमाला की ‘जंगल के आगे’ आत्म स्ंास्मरण निश्छल प्रेम और जड़ से जुड़े रहने की अनूठी गाथा है. यद्यपि मौलिक रूप से यह आत्म संस्मरण…