By toakhra

संविधान-सभा में करोड़ों आदिवासियों का एक प्रतिनिधि

– अखड़ा डेस्क | यह पुस्तक हमें उस प्रभावशाली और दूरदर्शी आदिवासी राजनीतिज्ञ के सोच-विचार से परिचित कराती है जिसे गांधी, नेहरु, जिन्ना और अंबेडकर के मुकाबले कभी नहीं याद किया गया। उस आदिवासी व्यक्तित्व…

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निश्छल प्रेम से जुड़े रहने की गाथा है ‘जंगल के आगे’

– अरविंद अविनाश  | 1968 में ब्लैकवूड द्वारा प्रकाशित सीता रत्नमाला की ‘जंगल के आगे’ आत्म स्ंास्मरण निश्छल प्रेम और जड़ से जुड़े रहने की अनूठी गाथा है. यद्यपि मौलिक रूप से यह आत्म संस्मरण…