Description
झारखंड के खोरठा नाट्य साहित्य पर यह पहला शोध कार्य है। यह पुस्तक एक आधार-ग्रंथ के रूप में अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यह न केवल खोरठा नाटकों का एक व्यवस्थित परिचय देती है, बल्कि शोधार्थियों, रंगकर्मियों और साहित्य-प्रेमियों के लिए एक दिशा भी निर्धारित करती है। विशेष रूप से अप्रकाशित और मंचित नाट्य कृतियों के संकलन और उनके विश्लेषण का प्रयास इस कार्य को और अधिक मूल्यवान बनाता है। इस ग्रंथ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह खोरठा नाट्य साहित्य को केवल पाठ्य रूप में नहीं देखता, बल्कि उसे रंगमंच, प्रस्तुति और सामाजिक संदर्भों के साथ जोड़कर समझने का प्रयास करता है। इसमें नाटकों की परंपरा, उनके विकास की पृष्ठभूमि, विभिन्न शैलियों का विवेचन, प्रमुख नाटकों का मूल्यांकन तथा खोरठा रंगमंच के इतिहास और वर्तमान की पड़ताल की गई है ।






