Description
जयपाल सिंह मुंडा की बहुचर्चित और एकमात्र अंग्रेजी आत्मकथा ‘लो बिर सेंदरा’ का मूल अंग्रेजी संस्करण के प्रकाशन के 20 साल बाद पहली बार हिंदी अनुवाद प्रस्तुत किया गया है। इस अनुवाद को आदिवासी विषयों के प्रसिद्ध लेखक और कथाकार अश्विनी कुमार पंकज ने किया है। यह एक अनमोल आदिवासी आत्मकथा है, जिसमें भारत के पहले हॉकी ओलंपिक विजेता की कहानी समाहित है।
यह कहानी उस महान शख्सियत की जुबानी है जिसने देश के लिए भारतीय सिविल सेवा (ICS) को त्याग दिया, संविधान सभा में आदिवासियों का प्रतिनिधित्व किया, और देश में आदिवासी राजनीति को एक नई पहचान दिलाई। यह आत्मकथा सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि भारत के सभी आदिवासी समुदायों की राजनीतिक और सामाजिक आवाज़ को उजागर करती है।







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