Description
भारतीय लेखकों द्वारा अंडमान पर जापानी कब्जे से संबंधित प्रकाशित पुस्तकों में इस ऑपरेशन का उल्लेख अत्यंत संक्षिप्त रूप में मिलता है। चिंताजनक बात यह है कि ऑपरेशन बाल्डहेड की सफलता में निर्णायक भूमिका निभाने वाले तीन आदिवासी जासूस—लोका (ग्रेट अंडमानी समुदाय से), जोसेफ बाख़ला और पतरस लकड़ा (दोनों झारखंड के आदिवासी) की पूर्णतः उपेक्षा की गई है। इनकी भूमिका इतनी केंद्रीय थी कि इनके बिना यह अभियान सफल नहीं हो सकता था। जोसेफ और पतरस पहले अंडमान के वन विभाग में कार्यरत रह चुके थे, जिससे उन्हें स्थानीय भूगोल, भाषा और परिस्थितियों की गहरी समझ थी।
यह उपन्यास, ‘ऑपरेशन बाल्डहेड’ जैसे अदृश्य लेकिन ऐतिहासिक अभियान के माध्यम से, राँचीवाले आदिवासियों की भागीदारी, योगदान और बलिदान को साहित्यिक रूप से रेखांकित करने का प्रयास है। इसमें वर्णित जोसेफ बाख़ला, पतरस लकड़ा, मतियस टोपनो और टीम बाल्डहेड के अन्य सदस्य—इन सभी के नाम ऐतिहासिक अभिलेखों पर आधारित हैं। इसके अतिरिक्त जो नाम और पात्र आते हैं, वे शोध और साक्ष्यों के आधार पर कल्पित हैं। घटनाएँ और स्थान वास्तविक हैं, हालांकि कुछ प्रसंगों में कथा प्रवाह बनाए रखने हेतु सृजनात्मक स्वतंत्रता ली गई है।







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