Description
अपनी विषयवस्तु और शिल्प, दोनों के लिहाज से यह हिन्दी का एक अनूठा उपन्यास है। लेखक की सादगीभरी भाषा भी गौर-तलब है। उसका गद्य नपा-तुला, आडम्बरहीन और ठोस है जिसमें भर्ती की कोई चीज नहीं। इस उपन्यास के कुछ प्रसंगों, घटनाओं और व्यक्तियों से 1970 के दशक में मैं व्यक्तिगत रूप से जुड़ा हुआ था, इसलिए मेरे लिए तो यह उपन्यास विशेष अर्थ रखता है। मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं कि झारखंड के आदिवासियों के बारे में लिखी गई यह सबसे श्रेष्ठ कृति है।
– वीर भारत तलवार







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