Description
अगर कोई जानवर उपनिवेशवादियों के अत्याचारों का प्रतिकार करे, तो उसे ‘वीर’ नहीं, बल्कि ‘पागल’, ‘खतरनाक’, या ‘नष्ट करने योग्य’ करार दिया जाता है। अंडमान द्वीप का नेपियर, जिसे ब्रिटिश दस्तावेज़ों में “एक दुष्ट हाथी” कहा गया। एक ऐसा जीव था जो 13 वर्षों तक ब्रिटिश उपनिवेशवाद का प्रतिरोध करता रहा—एक अकेले योद्धा की तरह।
नेपियर कहाँ का था हम नहीं जानते। उसे 1880 के आस-पास अंडमान भेजा गया, जहाँ उसका उपयोग अंग्रेजों ने जेल निर्माण, लकड़ी ढोने, और कैदियों की निगरानी जैसे कामों में लिया जाता था। नेपियर को यह गुलामी पसंद नहीं थी। वह लगातार भागने का प्रयास करता, काम में बाधा डालता, और कई बार जेल अधिकारियों के खिलाफ हिंसक भी हो जाता। 1890 के दशक से लेकर 1902 तक, उसने अनेक बार ब्रिटिश संरचनाओं को ध्वस्त किया, ब्रिटिश अफसरों पर हमला किया, और जंगलों में छिपकर रहता रहा। अंग्रेजों ने उसे पकड़ने के लिए विशेष अभियानों की योजना बनाई। उसे “मार देने योग्य सनकी हाथी” घोषित किया गया।
अंततः 28 अप्रैल 1902 को, एक सुनियोजित ऑपरेशन में उसे गोलियों से ढेर कर दिया गया। सी. ए. रोजर्स द्वारा लिखी गई इस हत्या की औपचारिक रिपोर्ट बताती है कि कैसे औपनिवेशिक तंत्र ने एक जानवर की स्वाभाविक आज़ादी और प्रतिरोध को “अपराध” बना दिया। पर नेपियर कोई दुष्ट या सनकी हाथी नहीं था, बल्कि एक आत्मसम्मानी जीव था, जो अपनी ज़मीन, जंगल, और शरीर की आज़ादी के लिए लड़ रहा था।







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