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सेंटिनली आदिवासियों से सबक

By Ashwini Kumar Pankaj

Original price was: ₹350.00.Current price is: ₹300.00.

राष्ट्र-राज्य के अतिक्रमण के विरुद्ध भू-क्षेत्रीय नकार की आदिवासी परंपरा। भारत के आदिवासी इतिहास, साहित्य और संघर्ष में अंडमान-निकोबार की सेंटिनली दुनिया।

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Description

अंडमान-निकोबार के आदिवासी समुदाय भारत के इतिहास के हाशिये पर रखे गए कोई ‘गुप्त’, ‘रहस्मयी’ या ‘लुप्त’ लोग नहीं हैं। वे जीवित हैं—अपनी स्मृतियों, अपनी भूमि, अपनी अस्मिता और अपनी दुनिया के साथ। इन समुदायों में सेंटिनली आदिवासी समुदाय की उपस्थिति सबसे विशिष्ट है। उन्होंने सदियों के बाहरी दबाव के बावजूद अपनी भू-क्षेत्रीय संप्रभुता और स्वायत्त अस्तित्व को बनाए रखा है।यह पुस्तक सेंटिनली समुदाय को रहस्य, रोमांच या सनसनी की दृष्टि से नहीं, बल्कि उनकी आदिवासियत, स्वायत्तता और अस्तित्व-बोध के भीतर से समझने की एक कोशिश है। भारत के आदिवासी इतिहास, साहित्य और विमर्श में अंडमान-निकोबार के समुदायों की उपस्थिति दर्ज करने की दिशा में एक गंभीर प्रयास है।